Kaun Hai Jo Ye Iltija Na Kare lyrics in Hindi

Kaun Hai Jo Ye Iltija Na Kare Lyrics in Hindi, Urdu & Roman English

कौन है जो ये इल्तिजा न करे – नात का ख़ुलासा

कौन है जो ये इल्तिजा न करे एक दिलकश इस्लामी नात शरीफ़ है जो हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में इल्तिजा और 'इश्क़ का इज़हार करती है। यह कलाम आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रह.) का है, जिसकी तज़मीन सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ने फ़रमाई। इस पोस्ट में पूरे लिरिक्स हिंदी, उर्दू और रोमन इंग्लिश में मौजूद हैं, साथ ही मतलब, ऑडियो और नात-ख्वान की मालूमात भी दी गई है।

"कौन है जो ये इल्तिजा न करे" एक बेहद रूहानी नात शरीफ़ है जिसमें बन्दे की अपने रब से इल्तिजा और हुज़ूर ﷺ से 'इश्क़ का बेपनाह जज़्बा बयान हुआ है। यह कलाम आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रह.) का है, जिसकी तज़मीन सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ने फ़रमाई। उन्हीं की आवाज़ में यह नात पूरी दुनिया में मशहूर है।

इस नात को सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ने अपनी मधुर और दर्द भरी आवाज़ में पेश किया है। उनका सूफ़ियाना अंदाज़ सुनने वालों को सीधे मदीने की फ़िज़ाओं में ले जाता है।

इस पोस्ट में आपको कौन है जो ये इल्तिजा न करे के हिंदी लिरिक्स, उर्दू लिरिक्स, रोमन इंग्लिश ट्रांसलिट्रेशन, पूरा मतलब और शायर व नात-ख्वान की मालूमात मिलेगी।

विवरणमालूमात
नात का नामकौन है जो ये इल्तिजा न करे (Kaun Hai Jo Ye Iltija Na Kare)
शायर (कलाम)आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रह.)
तज़मीनसय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी
नात-ख्वानसय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी
प्रकार (Genre)नात शरीफ़ (Islamic Devotional Poetry)
ज़बानउर्दू / हिंदी / रोमन English
मौक़ामीलाद, जुमा महफ़िल, रमज़ान, सूफ़ी समाँ

कौन है जो ये इल्तिजा न करे लिरिक्स हिंदी में

कौन है जो ये इल्तिजा न करे
कौन उन के लिए मरा न करे
कौन रो रो के ये दु'आ न करे
दिल को उन से ख़ुदा जुदा न करे
बेकसी लूट ले ख़ुदा न करे

'इश्क़ का सर पे डाल कर के ग़िलाफ़
बात अहल-ए-ख़िरद ये सुन लें साफ़
काम है कौन सा शरा' के ख़िलाफ़
इस में रौज़े का सज्दा हो कि तवाफ़
होश में जो न हो वो क्या न करे

रात-दिन हम गुनह में डूबे हैं
जुर्म जितने हैं सारे करते हैं
फिर भी आक़ा करीम ऐसे हैं
ये वही हैं कि बख़्श देते हैं
कौन इन जुर्मों पर सज़ा न करे

'इश्क़ ने कर दिया मुझे मशहूर
उन की यादों से ज़ेहन है मा'मूर
मुझ को इस बात पे है फ़ख़्र ज़रूर
दिल में रौशन है शम'-ए-'इश्क़-ए-हुज़ूर
काश ! जोश-ए-हवस हवा न करे

ज़ख़्म सीने के सारे सीने को
जो यहाँ मर रहे थे जीने को
ऐ वसी ! जाम-ए-'इश्क़ पीने को
ले, रज़ा ! सब चले मदीने को
मैं न जाऊँ अरे ख़ुदा न करे

कलाम: इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रह.)
तज़मीन व नात-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी

کون ہے جو یہ التجا نہ کرے (Urdu Lyrics)

کون ہے جو یہ التجا نہ کرے
کون ان کے لیے مرا نہ کرے
کون رو رو کے یہ دعا نہ کرے
دل کو ان سے خدا جدا نہ کرے
بیکسی لوٹ لے خدا نہ کرے

عشق کا سر پہ ڈال کر کے غلاف
بات اہل خرد یہ سن لیں صاف
کام ہے کون سا شرع کے خلاف
اس میں روضے کا سجدہ ہو کہ طواف
ہوش میں جو نہ ہو وہ کیا نہ کرے

رات دن ہم گناہ میں ڈوبے ہیں
جرم جتنے ہیں سارے کرتے ہیں
پھر بھی آقا کریم ایسے ہیں
یہ وہی ہیں کہ بخشتے ہیں
کون ان جرموں پر سزا نہ کرے

عشق نے کر دیا مجھے مشہور
ان کی یادوں سے ذہن ہے معمور
مجھ کو اس بات پہ ہے فخر ضرور
دل میں روشن ہے شمع عشق حضور
کاش ! جوش ہوس ہوا نہ کرے

زخم سینے کے سارے سینے کو
جو یہاں مر رہے تھے جینے کو
اے وسی ! جام عشق پینے کو
لے، رضا ! سب چلے مدینے کو
میں نہ جاؤں ارے خدا نہ کرے

کلام: امام احمد رضا خان (رح)
تضمین و نعت خواں: سید عبدالواسع قادری رضوی

Kaun Hai Jo Ye Iltija Na Kare Lyrics in Roman English

kaun hai jo ye iltija na kare
kaun un ke liye mara na kare
kaun ro ro ke ye du'aa na kare
dil ko un se KHuda juda na kare
bekasi looT le KHuda na kare

'ishq ka sar pe Daal kar ke Gilaaf
baat ahl-e-KHirad ye sun le.n saaf
kaam hai kaun saa shara' ke KHilaaf
is me.n rauze ka sajda ho ki tawaaf
hosh me.n jo na ho wo kya na kare

raat-din ham gunah me.n Doobe hai.n
jurm jitne hai.n saare karte hai.n
phir bhi aaqa kareem aise hai.n
ye wahi hai.n ki baKHsh dete hai.n
kaun in jurmo.n par saza na kare

'ishq ne kar diya mujhe mash.hoor
un ki yaado.n se zehn hai maa'moor
mujh ko is baat pe hai faKHr zaroor
dil me.n raushan hai sham'-e-'ishq-e-huzoor
kaash ! josh-e-hawas hawa na kare

zaKHm seene ke saare seene ko
jo yahaa.n mar rahe the jeene ko
ai Wasi ! jaam-e-'ishq peene ko
le, Raza ! sab chale madine ko
mai.n na jaau.n are KHuda na kare

Kalam: Imam Ahmad Raza Khan (RA)
Tazmeen & Naat-Khwaan: Sayyed Abdul Wasi Qadri Razavi

(Spotify पर सुनें – अगर ट्रैक लिंक ग़लत हो तो सही से बदलें)

कौन है जो ये इल्तिजा न करे का मतलब और अहम अल्फ़ाज़ की तशरीह

इस नात में गहरे उर्दू और फ़ारसी अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल हुआ है। नीचे अहम अल्फ़ाज़ और मुश्किल अंशों का हिंदी में मतलब दिया गया है:

मुश्किल अल्फ़ाज़ / अंशहिंदी में मतलब
इल्तिजामिन्नत, दुआ, गिड़गिड़ा कर माँगना
मरा न करेक़ुर्बान न हो, फ़िदा न हो (यहाँ हुज़ूर ﷺ पर जाँ निसार करने की बात)
बेकसी लूट लेबेबसी हावी हो जाए, मजबूरी छा जाए
ग़िलाफ़ढक्कन, लिबास – यहाँ 'इश्क़ को सर पर रखना
अहल-ए-ख़िरदअक़्लमंद लोग
शरा' के ख़िलाफ़शरीअत के ख़िलाफ़
रौज़े का सज्दा / तवाफ़रौज़ा-ए-अक़दस को सज्दा या उसका तवाफ़ – शायर कह रहा है कि 'इश्क़ में यह सब शरीअत के मुताबिक़ है
मा'मूरभरा हुआ, आबाद
शम'-ए-'इश्क़-ए-हुज़ूरहुज़ूर ﷺ के 'इश्क़ की शमा (रौशनी)
जोश-ए-हवसख़्वाहिश का जोश, हवस का तूफ़ान – यहाँ इससे बचने की दुआ
जाम-ए-'इश्क़ पीने को'इश्क़ का प्याला पीने के लिए (सूफ़ियाना इस्तिलाह)
वसी, रज़ाअब्दुल वसी क़ादरी और इमाम अहमद रज़ा – नात-ख्वान और शायर का ज़िक्र
💡 नात का पैग़ाम:

यह नात बन्दे की अपने रब और सरकार ﷺ से बेइंतिहा मोहब्बत का इज़हार है। शायर कहता है – कौन है जो हुज़ूर ﷺ के लिए दुआ न करे, क़ुर्बान न हो? हर लाइन में 'इश्क़-ए-रसूल की गहराई और गुनाहों की माफ़ी की उम्मीद झलकती है। आख़िर में वसी और रज़ा का ज़िक्र करके बताया गया कि सब मदीने चलो, यही सबसे बड़ी ख़्वाहिश है।

शायर और नात-ख्वान की मालूमात

✍️ आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रह.)

आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िले बरेलवी (1856-1921) बरेली शरीफ़ के अज़ीम आलिम, मुहद्दिस और शायर थे। उनकी नातिया शायरी में 'इश्क़-ए-रसूल और शरीअत की गहरी रौशनी मिलती है। "कौन है जो ये इल्तिजा न करे" उनका एक नायाब कलाम है।

🎤 सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी

सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी एक मक़बूल नात-ख्वान और सूफ़ी शायर हैं। उन्होंने आला हज़रत के इस कलाम की तज़मीन करके इसे नया हुस्न बख़्शा। उनकी आवाज़ में एक रूहानी तासीर है जो सीधे दिल को छूती है।

▶️ YouTube पर सुनें — Kaun Hai Jo Ye Iltija Na Kare

इस नात का YouTube वीडियो जल्द ही उपलब्ध होगा। (आप सही वीडियो ID से बदलें)



❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवालात (FAQ)

Q: कौन है जो ये इल्तिजा न करे नात किसने लिखी है?

यह नात आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रह.) का कलाम है, जिसकी तज़मीन सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ने की है।

Q: Kaun Hai Jo Ye Iltija Na Kare ka matlab kya hai?

इसका मतलब है – "कौन है जो यह मिन्नत न करे" यानी हर कोई हुज़ूर ﷺ के लिए दुआ और क़ुर्बानी करता है। यह 'इश्क़-ए-रसूल का इज़हार है।

Q: इस नात को किसने गाया है?

इसे सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ने अपनी आवाज़ में पेश किया है, जिन्होंने इसकी तज़मीन भी की है।

Q: Kaun Hai Jo Ye Iltija Na Kare lyrics PDF download कैसे करें?

लिरिक्स कॉपी करें या Ctrl+P दबाकर "Save as PDF" करें।

हमें उम्मीद है कि कौन है जो ये इल्तिजा न करे नात लिरिक्स की यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी। आला हज़रत और अब्दुल वसी क़ादरी के इस रूहानी कलाम को पढ़कर और सुनकर अपनी अक़ीदत ताज़ा करें। और भी नातों और मन्क़बतों के लिए Naat Lyrics World पर आते रहें। शेयर ज़रूर करें — 🤲

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