Wah Kya Martaba Ae Ghous Hai Bala Tera hindi Lyrics | Manqabat-e- Gause Azam lyrics

Wah Kya Martaba Ae Ghous Hai Bala Tera Lyrics in Hindi, Urdu & Roman English

Wah Kya Martaba Ae Ghous Hai Bala Tera – मन्क़बत का ख़ुलासा

Wah Kya Martaba Ae Ghous Hai Bala Tera एक मशहूर इस्लामी मन्क़बत है जो ग़ौस-उल-आज़म हज़रत अब्दुल क़ादिर जीलानी (रह.) की शान में लिखी गई है। इस पोस्ट में पूरे लिरिक्स हिंदी, उर्दू और रोमन इंग्लिश में मौजूद हैं, साथ ही मतलब, वीडियो और मन्क़बत ख्वानों की मालूमात भी दी गई है।

"वाह क्या मर्तबा ऐ ग़ौस है बाला तेरा" एक बेमिसाल सूफ़ियाना मन्क़बत है जो ग़ौस-ए-आज़म हज़रत शेख अब्दुल क़ादिर जीलानी (रह.) की शान में आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रह.) ने तहरीर फ़रमाई थी। यह मन्क़बत अपने अन्दर अक़ीदत, मोहब्बत और ग़ौस-ए-आज़म के बेपनाह करम की दास्ताँ समेटे हुए है। हर शेर में एक नया रंग और गहरी रूहानियत महसूस होती है।

इस मन्क़बत को ओवैस रज़ा क़ादरी और महमूद उल हसन क़ादरी जैसे बुज़ुर्ग नात-ख्वानों ने अपनी सुरीली आवाज़ों से सजाया है। ख़ास तौर पर ग्यारहवीं शरीफ़, उर्स-ए-ग़ौस-ए-आज़म और क़ादरिया महफ़िलों में इस मन्क़बत को बड़ी अक़ीदत के साथ सुना जाता है।

इस पोस्ट में आपको वाह क्या मर्तबा ऐ ग़ौस है बाला तेरा के हिंदी लिरिक्स, उर्दू लिरिक्स, रोमन अंग्रेज़ी ट्रांसलिट्रेशन, पूरा मतलब और शायर व मन्क़बत ख्वानों की मालूमात मिलेगी।

विवरणमालूमात
मन्क़बत का नामवाह क्या मर्तबा ऐ ग़ौस है बाला तेरा (Wah Kya Martaba Ae Ghous Hai Bala Tera)
शायरआला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रह.)
मन्क़बत ख्वानओवैस रज़ा क़ादरी, महमूद उल हसन कादरी
प्रकार (Genre)मन्क़बत (ग़ौस-ए-आज़म की शान में)
ज़बानउर्दू / हिंदी / रोमन English
मौक़ाग्यारहवीं शरीफ़, उर्स-ए-ग़ौस-ए-आज़म, सूफ़ी महफ़िल

वाह क्या मर्तबा ऐ ग़ौस है बाला तेरा लिरिक्स हिंदी में

वाह क्या मर्तबा ऐ ग़ौस है बाला तेरा
ऊँचे ऊँचों के सरों से क़दम आला तेरा

सर भला क्या कोई जाने कि है कैसा तेरा
अवलिया मलते हैं आँखें वो हैं तलवा तेरा

क्या दबे जिस पे हिमायत का हो पंजा तेरा
शेर को ख़तरे में लाता नहीं कुत्ता तेरा

तू हुसैनी हसनी क्यूँ न मुहीउद्दीन हो
ऐ ख़िज़्र मजमा-ए-बहारें हैं चश्मा तेरा

क़समें दे दे कि खिलाता है पिलाता है तुझे
प्यारा अल्लाह तेरा चाहने वाला तेरा

मुस्तफ़ा के तने बे-साया का साया देखा
जिस ने देखा मिरे जाँ जलवा-ए-जेबा तेरा

बने ज़हरा को मुबारक हो उरूसे क़ुदरत
क़ादरी पाए तसद्दुक़ मेरे दूल्हा तेरा

क्यूँ न क़ासिम हो कि तू इब्ने अबिल क़ासिम है
क्यूँ न क़ादरी हो कि मुख़्तार है बाबा तेरा

नबवी मेह, अलवी फ़श्ल, बतूली गुलशन
हसनी फूल हुसैनी हैं महकना तेरा

नबवी जिल, अलवी बुज्न, बतूली मंज़िल
हसनी चाँद हुसैनी हनी उजाला तेरा

नबवी ख़ुर, अलवी कोह, बतूली मा'दिन
हसनी लाल हुसैनी हैं तजल्ला तेरा

बहर-ओ-बर, सहर-ओ-करी, सहल-ओ-हुज्जन, दश्त-ओ-चमन
कौन से चक पे पहुँचता नहीं दावा तेरा

हुस्ने नीयत हो ख़ता फिर कभी करता ही नहीं
आज़माया है यगाना है दोगाना तेरा

आरज़ू एहवाल की प्यासों में कहाँ ताब मगर
आँखें इक अब्र-ए-करम तकती हैं रस्ता तेरा

मोत नज़दीक गुनाहों की तह-ए-मैल के खोल
आ बरस जा कि नहा ढो ले ये प्यासा तेरा

अब आमद वो कहे और मैं तयम्मुम बरख़ास्त
मुश्त-ए-ख़ाक अपनी हो और नूर का अहला तेरा

जाँ तो जाती ही जाएगी क़ियामत ये है
कि यहाँ मरने पे ठहरा है नज़ारा तेरा

तुझ से दर, दर से सग, और सग से है मुझको निस्बत
मेरी गर्दन में भी दूर का डोरा तेरा

इस निसानी के जो सग हैं नहीं मारे जाते
हश्र तक मेरे गले में रहे पट्टा तेरा

मेरी क़िस्मत की क़सम खाए सगाने बग़दाद
हिन्द में भी हूँ तो देता रहूँ पहरा तेरा

तेरे इज़्ज़त के निसार ऐ मेरे ग़ैरत वाले
आह सद आह कि यूँ ख़्वार हो बर्दा तेरा

बद सही, चोर सही, मुजरिम-ओ-नाकारा सही
ऐ वो कैसा ही सही है तू करीमा तेरा

मुझ को रुस्वा भी अगर कोई कहेगा तो यूँही
कि वही ना वो रिजा बन्दा-ए-रुस्वा तेरा

हैं रिजा यूँ न बिलक तू नहीं ज़ायद तो न हो
सय्यदे ज़ायदे हर दहर हैं मौला तेरा

फ़ख़्र-ए-आका में रज़ा और भी इक नज़्म-ए-रफ़ी
आ चल लिख लाएँ सना ख़्वानों में चेहरा तेरा

- आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रह.)

واہ کیا مرتبہ اے غوث ہے بالا تیرا (Urdu Lyrics)

واہ کیا مرتبہ اے غوث ہے بالا تیرا
اونچے اونچوں کے سروں سے قدم اعلیٰ تیرا

سر بھلا کیا کوئی جانے کہ ہے کیسا تیرا
اولیاء ملتے ہیں آنکھیں وہ ہیں تلوا تیرا

کیا دبے جس پہ حمایت کا ہو پنجہ تیرا
شیر کو خطرے میں لاتا نہیں کتا تیرا

تو حسینی حسنی کیوں نہ محی الدین ہو
اے خضر مجموعۂ بہاریں ہیں چشمہ تیرا

قسمیں دے دے کہ کھلاتا ہے پلاتا ہے تجھے
پیارا اللہ تیرا چاہنے والا تیرا

مصطفیٰ کے تن بے سایہ کا سایہ دیکھا
جس نے دیکھا مرے جاں جلوۂ زیبا تیرا

بنے زہرا کو مبارک ہو عروس قدرت
قادری پائے تصدق میرے دولہا تیرا

کیوں نہ قاسم ہو کہ تو ابن ابی القاسم ہے
کیوں نہ قادری ہو کہ مختار ہے بابا تیرا

نبوی مہ، علوی فضل، بتولی گلشن
حسنی پھول حسینی ہیں مہکنا تیرا

نبوی جل، علوی بجن، بتولی منزل
حسنی چاند حسینی ہنی اجالا تیرا

نبوی خور، علوی کوہ، بتولی معدن
حسنی لال حسینی ہیں تجلا تیرا

بحر و بر، سحر و کری، سہل و حزن، دشت و چمن
کون سے چک پہ پہنچتا نہیں دعویٰ تیرا

حسن نیت ہو خطا پھر کبھی کرتا ہی نہیں
آزمایا ہے یگانہ ہے دوگانہ تیرا

آرزوئے احوال کی پیاسوں میں کہاں تاب مگر
آنکھیں اک ابر کرم تکتی ہیں راستہ تیرا

موت نزدیک گناہوں کی تہ میل کے کھول
آ برس جا کہ نہا ڈھو لے یہ پیاسا تیرا

اب آمد وہ کہے اور میں تیمم برخاست
مشت خاک اپنی ہو اور نور کا اہلا تیرا

جاں تو جاتی ہی جائے گی قیامت یہ ہے
کہ یہاں مرنے پہ ٹھہرا ہے نظارا تیرا

تجھ سے در، در سے سگ، اور سگ سے ہے مجھ کو نسبت
میری گردن میں بھی دور کا ڈورا تیرا

اس نشانی کے جو سگ ہیں نہیں مارے جاتے
حشر تک میرے گلے میں رہے پٹا تیرا

میری قسمت کی قسم کھائے سگان بغداد
ہند میں بھی ہوں تو دیتا رہوں پہرا تیرا

تیری عزت کے نثار اے میرے غیرت والے
آہ صد آہ کہ یوں خوار ہو بردہ تیرا

بد سہی، چور سہی، مجرم و ناکارہ سہی
اے وو کیسا ہی سہی ہے تو کریمہ تیرا

مجھ کو رسوا بھی اگر کوئی کہے گا تو یوں ہی
کہ وہی نہ وہ رضا بندۂ رسوا تیرا

ہیں رضا یوں نہ بلک تو نہیں زائد تو نہ ہو
سید زائد ہر دہر ہیں مولا تیرا

فخر آقا میں رضا اور بھی اک نظم رفیع
آ چل لکھ لائیں ثنا خوانوں میں چہرہ تیرا

- اعلیٰ حضرت امام احمد رضا خان (رح)

Wah Kya Martaba Ae Ghous Hai Bala Tera Lyrics in Roman English

Wah kya martaba ae Ghous hai bala tera
oonche ooncho.n ke saro.n se qadam a'ala tera

Sar bhala kya koi jaane ki hai kaisa tera
auliya malte hain aankhe.n wo hain talwa tera

Kya dabe jis pe himayat ka ho panja tera
sher ko khatre me.n laata nahi.n kutta tera

Tu Husaini Hasani kyu.n na Muhiyuddin ho
ae Khizr majma-e-bahaare.n hain chashma tera

Qasame.n de de ki khilata hai pilata hai tujhe
pyara Allah tera chaahne wala tera

Mustafa ke tan-e-be-saya ka saya dekha
jis ne dekha mere jaa.n jalwa-e-zeba tera

Bane Zahra ko mubarak ho uroos-e-qudrat
Qadri paaye tasadduq mere dulha tera

Kyu.n na Qasim ho ki tu ibne Abil Qasim hai
kyu.n na Qadri ho ki mukhtar hai baba tera

Nabavi meh, Alvi fazl, Batooli gulshan
Hasani phool Husaini hain mahakna tera

Nabavi jil, Alvi bujn, Batooli manzil
Hasani chaand Husaini hani ujala tera

Nabavi khur, Alvi koh, Batooli ma'adin
Hasani laal Husaini hain tajalla tera

Bahr-o-bar, sahr-o-kari, sahl-o-huzn, dasht-o-chaman
kaun se chak pe pahunchta nahi.n da'wa tera

Husn-e-niyyat ho khata phir kabhi karta hi nahi
aazmaya hai yagana hai dogana tera

Aarzu-e-ahwal ki pyaso.n me.n kaha.n taab magar
aankhe.n ik abr-e-karam takti hain rasta tera

Maut nazdeek gunaho.n ki tah-e-mail ke khol
aa baras ja ki naha dhaule ye pyasa tera

Ab aamad wo kahe aur main tayammum barkhast
musht-e-khaak apni ho aur noor ka ahla tera

Jaan to jaati hi jaegi qayamat ye hai
ki yaha.n marne pe thahra hai nazara tera

Tujh se dar, dar se sag, aur sag se hai mujhko nisbat
meri gardan me.n bhi door ka dora tera

Is nisani ke jo sag hain nahi.n maare jaate
hashr tak mere gale me.n rahe patta tera

Meri qismat ki qasam khaaye sagane Baghdad
Hind me.n bhi hoo.n to deta rahoo.n pahra tera

Tere izzat ke nisaar ae mere ghairat wale
aah sad aah ki yu.n khwar ho barda tera

Bad sahi, chor sahi, mujrim-o-nakara sahi
ae wo kaisa hi sahi hai tu kareema tera

Mujh ko ruswa bhi agar koi kahega to yunhi
ki wahi na wo Raza banda-e-ruswa tera

Hain Raza yu.n na bilak tu nahi.n zaayed to na ho
Sayyade zaayed har dahar hain maula tera

Fakhr-e-Aaka me.n Raza aur bhi ik nazm-e-rafee
aa chal likh laaye.n sana khwaano.n me.n chehra tera

- Ala Hazrat Imam Ahmad Raza Khan (RA)

🔊 ऑडियो सुनें — Wah Kya Martaba Ae Ghous Hai Bala Tera

नीचे दिए गए प्लेयर से इस मन्क़बत की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनें (Spotify / SoundCloud / MP3):

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वाह क्या मर्तबा का मतलब और अहम अल्फ़ाज़ की तशरीह (Meaning)

यह मन्क़बत अरबी, फ़ारसी और उर्दू के गहरे अल्फ़ाज़ का ख़ज़ाना है। नीचे अहम अल्फ़ाज़ और मुश्किल अंशों का हिंदी में मतलब दिया गया है:

मुश्किल अल्फ़ाज़ / अंशहिंदी में मतलब
बालासबसे ऊँचा, बुलंद, श्रेष्ठ
तलवापाँव का तलुआ, यहाँ मुराद जूता/क़दम का निशाँ
पंजाहथेली, हिफ़ाज़त का हाथ
मजमा-ए-बहारेंबहारों का मजमूआ, ख़ुशियों का चश्मा
जलवा-ए-जेबाख़ूबसूरत दीदार, हसीं नूर
तसद्दुक़सदक़ा, क़ुर्बानी (यहाँ मुबारकबाद का जज़्बा)
मुख़्तारइख़्तियार वाला, चुना हुआ, सरबराह
यगाना / दोगानाएकमात्र / दोहरा – यानी आपकी नेकी लाजवाब है
अब्र-ए-करमकरम का बादल, रहमत का अब्र
तयम्मुम बरख़ास्तपाकी का इरादा ख़त्म – यानी ज़ाहिरी सई छोड़ दी
सगाने बग़दादबग़दाद के सग – यहाँ ग़ौस-ए-आज़म के आस्ताने के फ़क़ीरों के लिए इस्तेमाल
💡 मन्क़बत का ख़ुलासा:

इस मन्क़बत में आला हज़रत (रह.) ग़ौस-ए-आज़म के अज़ीम रुतबे को बयान फ़रमाते हैं। वो कहते हैं कि आपका मर्तबा इतना बुलंद है कि बड़े-बड़े बुज़ुर्गों के सर आपके क़दमों से नीचे हैं, आपकी निस्बत का सग भी शेरों से बेख़ौफ़ रहता है। आप हज़रत अली और बीबी फ़ातिमा के नूर से बने हैं, और हर ज़र्रे में आपका तजल्ला है। आख़िर में वो अपनी पहचान आपके आस्ताने के सग के तौर पर पेश करते हैं और दुआ करते हैं कि क़यामत तक यह पट्टा गले में रहे। यह निस्बत और अक़ीदत की इंतिहा है।

शायर और मन्क़बत ख्वानों के बारे में

✍️ आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रह.)

आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िले बरेलवी (1856-1921) बरेली शरीफ़ के अज़ीम इस्लामी आलिम, सूफ़ी मुहद्दिस, और लाजवाब शायर थे। उनकी नातिया शायरी और मन्क़बतों का कोई सानी नहीं। "वाह क्या मर्तबा ऐ ग़ौस है बाला तेरा" जैसी मन्क़बतें उनकी अज़ीम शाइरी और अक़ीदत का शाहकार हैं।

🎤 ओवैस रज़ा क़ादरी (Owais Raza Qadri)

ओवैस रज़ा क़ादरी ने इस मन्क़बत को अपनी पुर-कशिश आवाज़ में पढ़कर इसे सारी दुनिया में मशहूर कर दिया। उनकी आवाज़ में एक सूफ़ियाना कशिश है जो सीधे दिल में उतरती है।

🎤 महमूद उल हसन क़ादरी (Mahmood ul Hasan Qadri)

महमूद उल हसन क़ादरी ने भी इस मन्क़बत को बड़ी ख़ूबसूरती से पेश किया है। उनकी गम्भीर और दर्द भरी आवाज़ इस मन्क़बत की रूहानियत को चार चाँद लगा देती है।

▶️ YouTube पर सुनें — Wah Kya Martaba Ae Ghous Hai Bala Tera

यहाँ इस शानदार मन्क़बत को ओवैस रज़ा क़ादरी की आवाज़ में सुनें:


❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवालात (FAQ)

Q: वाह क्या मर्तबा ऐ ग़ौस है बाला तेरा मन्क़बत किसके लिए लिखी गई है?

यह मन्क़बत पूरी तरह से ग़ौस-उल-आज़म हज़रत शेख अब्दुल क़ादिर जीलानी (रह.) की शान में है।

Q: इस मन्क़बत के शायर कौन हैं?

शायर आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िले बरेलवी (रह.) हैं।

Q: Wah Kya Martaba ka matlab kya hai?

"ऐ ग़ौस, आपका रुतबा कितना बुलंद है।" यह ग़ौस-ए-आज़म की अज़मत का एलान है।

Q: Wah Kya Martaba lyrics PDF download कैसे करें?

लिरिक्स कॉपी करें या Ctrl+P दबाकर "Save as PDF" करें।

Q: यह मन्क़बत किस मौक़े पर ज़्यादा पढ़ी जाती है?

ग्यारहवीं शरीफ़, उर्स-ए-ग़ौस-ए-आज़म, और क़ादरिया सूफ़ी महफ़िलों में ख़ास तौर पर पढ़ी जाती है।

हमें उम्मीद है कि वाह क्या मर्तबा ऐ ग़ौस है बाला तेरा मन्क़बत लिरिक्स की यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी। आला हज़रत के इस शाहकार कलाम को पढ़कर और सुनकर ग़ौस-ए-आज़म की बारगाह में अपनी अक़ीदत ताज़ा करें। ऐसी ही और मन्क़बतों और नातों के लिए Naat Lyrics World पर आते रहें। इस पोस्ट को शेयर ज़रूर करें — 🤲

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