"इमदाद कुन इमदाद कुन" एक बेहद रूहानी और दिलकश इस्लामिक मन्क़बत है जो ग़ौस-ए-आज़म हज़रत शेख अब्दुल क़ादिर जीलानी (रह.) की शान में पढ़ी जाती है। इस मन्क़बत में हर लफ़्ज़ अक़ीदत और मोहब्बत से लबरेज़ है, जो सुनने वाले को अल्लाह के वली की बारगाह में मदद की गुहार लगाने का जज़्बा देता है।
इस मन्क़बत को महमूद उल हसन क़ादरी और ओवैस रज़ा क़ादरी जैसे नामवर नात व मन्क़बत ख्वानों ने अपनी खूबसूरत आवाज़ में पेश किया है। ख़ासतौर पर ग्यारहवीं शरीफ़, उर्स-ए-ग़ौस-ए-आज़म और सूफ़ी महफ़िलों में इस मन्क़बत को बड़े शौक़ से सुना व पढ़ा जाता है।
इस पोस्ट में आपको इमदाद कुन इमदाद कुन के हिंदी लिरिक्स, उर्दू लिरिक्स, रोमन अंग्रेज़ी ट्रांसलिट्रेशन, मन्क़बत का मतलब (meaning), और मन्क़बत ख्वानों की पूरी जानकारी एक ही जगह मिल जाएगी।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मन्क़बत का नाम | इमदाद कुन इमदाद कुन (Imdad Kun Imdad Kun) |
| मन्क़बत ख्वान | महमूद उल हसन कादरी, ओवैस रज़ा क़ादरी व अन्य |
| प्रकार (Genre) | मन्क़बत (Islamic Devotional Poetry – ग़ौस-ए-आज़म की शान में) |
| भाषा | उर्दू / हिंदी / रोमन English |
| मौका | ग्यारहवीं शरीफ़, उर्स-ए-ग़ौस-ए-आज़म, सूफ़ी महफ़िल |
| लिरिक्स भाषाएं | हिंदी, उर्दू, रोमन English |
इमदाद कुन इमदाद कुन लिरिक्स हिंदी में
दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-उल-आ’ज़म दस्त-गीर !
तेरे हाथ में हाथ मैंने दिया है
तेरे हाथ है लाज या ग़ौस-ए-आज़म !
इमदाद कुन इमदाद कुन, अज़ रंज-ओ-ग़म आज़ाद कुन
दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-उल-आ’ज़म दस्तगीर !
निकाला है पहले तो डूबे हुओं को
और अब डूबतों को बचा ग़ौस-ए-आज़म !
इमदाद कुन इमदाद कुन, अज़ रंज-ओ-ग़म आज़ाद कुन
दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-उल-आ’ज़म दस्तगीर !
भंवर में फसा है सफीना हमारा
बचा ग़ौस-ए-आज़म ! बचा ग़ौस-ए-आज़म !
इमदाद कुन इमदाद कुन, अज़ रंज-ओ-ग़म आज़ाद कुन
दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-उल-आ’ज़म दस्तगीर !
क़सम है के मुश्किल को मुश्किल न पाया
कहा हमने जिस वक़्त या ग़ौस-ए-आज़म !
इमदाद कुन इमदाद कुन, अज़ रंज-ओ-ग़म आज़ाद कुन
दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-उल-आ’ज़म दस्तगीर !
मुरीदों की खतरा नहीं बहर-ए-ग़म से
के बेड़े के हैं ना-खुदा ग़ौस-ए-आज़म
इमदाद कुन इमदाद कुन, अज़ रंज-ओ-ग़म आज़ाद कुन
दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-उल-आ’ज़म दस्तगीर !
कहे किस से जा कर हसन अपने दिल की
सुने कौन तेरे सिवा ग़ौस-ए-आज़म
इमदाद कुन इमदाद कुन, अज़ रंज-ओ-ग़म आज़ाद कुन
दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-उल-आ’ज़म दस्तगीर !
امداد کن امداد کن منقبت کے بول (Urdu Lyrics)
در دین و دنیا شاد کن، یا غوث الاعظم دستگیر!
تیرے ہاتھ میں ہاتھ میں نے دیا ہے
تیرے ہاتھ ہے لاج، یا غوثِ اعظم!
امداد کن، امداد کن، از رنج و غم آزاد کن
در دین و دنیا شاد کن، یا غوث الاعظم دستگیر!
نکالا ہے پہلے تو ڈوبے ہوؤں کو
اور اب ڈوبتوں کو بچا، غوثِ اعظم!
امداد کن، امداد کن، از رنج و غم آزاد کن
در دین و دنیا شاد کن، یا غوث الاعظم دستگیر!
بھنور میں پھنسہ ہے سفینہ ہمارا
بچا غوثِ اعظم! بچا غوثِ اعظم!
امداد کن، امداد کن، از رنج و غم آزاد کن
در دین و دنیا شاد کن، یا غوث الاعظم دستگیر!
قسم ہے کہ مشکل کو مشکل نہ پایا
کہا ہم نے جس وقت، یا غوثِ اعظم!
امداد کن، امداد کن، از رنج و غم آزاد کن
در دین و دنیا شاد کن، یا غوث الاعظم دستگیر!
مریدوں کو خطرہ نہیں بحرِ غم سے
کہ بیڑے کے ہیں ناخدا، غوثِ اعظم!
امداد کن، امداد کن، از رنج و غم آزاد کن
در دین و دنیا شاد کن، یا غوث الاعظم دستگیر!
کہے کس سے جا کر حسن اپنے دل کی
سنے کون تیرے سوا، غوثِ اعظم!
امداد کن، امداد کن، از رنج و غم آزاد کن
در دین و دنیا شاد کن، یا غوث الاعظم دستگیر!
Imdad Kun Imdad Kun Lyrics in Roman English (Transliteration)
dar deen-o-duniya shaad kun, ya Ghaus-ul-A'zam dast-geer!
tere haath me.n haath maine diya hai
tere haath hai laaj ya Ghaus-e-Azam!
imdaad kun imdaad kun, az ranj-o-gham aazaad kun
dar deen-o-duniya shaad kun, ya Ghaus-ul-A'zam dastgeer!
nikaala hai pahle to doobe huo.n ko
aur ab doobto.n ko bacha Ghaus-e-Azam!
imdaad kun imdaad kun, az ranj-o-gham aazaad kun
dar deen-o-duniya shaad kun, ya Ghaus-ul-A'zam dastgeer!
bha.nwar me.n phasa hai safeena hamaara
bacha Ghaus-e-Azam! bacha Ghaus-e-Azam!
imdaad kun imdaad kun, az ranj-o-gham aazaad kun
dar deen-o-duniya shaad kun, ya Ghaus-ul-A'zam dastgeer!
qasam hai ke mushkil ko mushkil na paaya
kaha hamne jis waqt ya Ghaus-e-Azam!
imdaad kun imdaad kun, az ranj-o-gham aazaad kun
dar deen-o-duniya shaad kun, ya Ghaus-ul-A'zam dastgeer!
mureedo.n ki khatra nahi.n bahr-e-gham se
ke be.De ke hai.n naa-KHuda Ghaus-e-Azam
imdaad kun imdaad kun, az ranj-o-gham aazaad kun
dar deen-o-duniya shaad kun, ya Ghaus-ul-A'zam dastgeer!
kahe kis se ja kar hasan apne dil ki
sune kaun tere siwa Ghaus-e-Azam
imdaad kun imdaad kun, az ranj-o-gham aazaad kun
dar deen-o-duniya shaad kun, ya Ghaus-ul-A'zam dastgeer!
इमदाद कुन इमदाद कुन का मतलब (Meaning in Hindi)
यह मन्क़बत फ़ारसी और उर्दू के गहरे शब्दों से सजी हुई है। नीचे मुख्य शब्दों और पंक्तियों का आसान हिंदी में अर्थ दिया गया है:
| उर्दू / फ़ारसी शब्द | हिंदी में मतलब |
|---|---|
| इमदाद (Imdad) | मदद, सहायता |
| कुन (Kun) | करो (फ़ारसी में आदेश का रूप) |
| अज़ (Az) | से (से मुक्त, से दूर) |
| रंज-ओ-ग़म (Ranj-o-Gham) | दुख और दुख-दर्द, ग़म |
| आज़ाद कुन (Aazad Kun) | मुक्त करो, रिहा करो |
| दर दीन-ओ-दुनिया (Dar Deen-o-Duniya) | धर्म और संसार में |
| शाद कुन (Shaad Kun) | खुश करो, प्रसन्न करो |
| ग़ौस-उल-आज़म (Ghaus-ul-Azam) | सबसे बड़े मददगार — हज़रत अब्दुल क़ादिर जीलानी का लक़ब |
| दस्तगीर (Dastgeer) | हाथ पकड़ने वाला, मददगार |
| सफीना (Safeena) | कश्ती, जहाज़ |
| ना-खुदा (Naa-Khuda) | नाव-चालक, जहाज़ का कप्तान |
| लाज (Laaj) | इज़्ज़त, आबरू |
यह मन्क़बत ग़ौस-ए-आज़म की बारगाह में एक दिली इल्तिजा है। शायर कह रहा है — “ऐ ग़ौस-ए-आज़म, मुझे दुखों और ग़मों से आज़ाद करो, मेरे दीन और दुनिया को खुशियों से भर दो।” जिस तरह पहले आपने डूबते हुओं को बचाया, अब हमें भी भंवर से निकालो। मुरीदों की कश्ती के कप्तान आप ही हैं। इस मन्क़बत में पूर्ण विश्वास है कि ग़ौस-ए-आज़म हर मुश्किल को आसान कर देते हैं।
मन्क़बत ख्वानों के बारे में
🎤 महमूद उल हसन क़ादरी (Mahmood ul Hasan Qadri)
महमूद उल हसन क़ादरी पाकिस्तान के जाने-माने नात व मन्क़बत ख्वान हैं। उनकी आवाज़ में एक विशेष गहराई और सूफ़ियाना कशिश है जो सुनने वालों के दिलों को छू लेती है। उन्होंने विशेष रूप से सूफ़ी मन्क़बतों और नातों को अपनी आवाज़ देकर इन्हें दुनिया भर में मशहूर किया। "इमदाद कुन इमदाद कुन" उनकी सबसे लोकप्रिय प्रस्तुतियों में से एक है, जिसे ग्यारहवीं शरीफ़ और उर्स की महफ़िलों में बड़ी अक़ीदत के साथ सुना जाता है।
🎤 ओवैस रज़ा क़ादरी (Owais Raza Qadri)
ओवैस रज़ा क़ादरी ने भी "इमदाद कुन इमदाद कुन" मन्क़बत को अपनी अनोखी शैली में पेश किया है। वे पहले ही नातों की दुनिया के बेताज बादशाह माने जाते हैं, और उनकी मन्क़बतों में भी एक अलग ही रूहानियत पाई जाती है। उनकी आवाज़ का जादू इस मन्क़बत को और भी दिलकश बना देता है, जिससे सुनने वाला बार-बार सुनने पर मजबूर हो जाता है।
▶️ YouTube पर सुनें — Imdad Kun Imdad Kun Manqabat
नीचे दिए गए वीडियो में "इमदाद कुन इमदाद कुन" मन्क़बत को सुनें:
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
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हमें उम्मीद है कि इमदाद कुन इमदाद कुन मन्क़बत लिरिक्स हिंदी और उर्दू में यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी। अगर आप किसी और नात या मन्क़बत के लिरिक्स ढूंढ रहे हैं तो हमारी वेबसाइट Naat Lyrics World पर ज़रूर विज़िट करें। इस मन्क़बत को अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें ताकि वे भी ग़ौस-ए-आज़म की बारगाह में इस दुआ का सवाब पा सकें। 🤲
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